October 25, 2021

पायलट की माँगें क्यों नहीं मान रहा आलाकमान, सचिन की लड़ाई हुई मुश्किल !

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राजस्थान की सियासत में शह और मात का खेल चल रहा है कभी पायलट घोड़े की ढाई चाल चलते हैं तो कभी गहलोत ऊंट की टेढ़ी चाल लेकिन सियासी शतरंज में दोनों ही तरफ राजा की भूमिका नजर आती है और जंग एक राजा के जरिए दूसरे राजा को हरा सिंहासन पर कब्जा करने की है !

वहीं जिस सिंहासन पर अशोक गहलोत इस वक्त बैठे हैं उस पर बैठने का सपना सचिन पायलट लंबे वक्त से बना रहे है लेकिन अब सवाल सिंहासन से पहले अपने-अपने वजीर, ऊंट, घोड़े और हाथी चुनने का है दोनों ही टीमें नहीं चाहती कि उनके विधायक प्यादे की भूमिका में नजर आए !

इन सबके बीच में सचिन गुट एक बार फिर से दिल्ली की तरफ देख रहा है क्योंकि अंदर खाने खबर है अजय माकन एक रिपोर्ट बनाकर दिल्ली पहुंचे हैं सचिन पायलट गुट यह चाहता है कि जल्दी से जल्दी मंत्रिमंडल विस्तार हो जाए और उनकी मांगों को मान लिया जाए !

तो वहीं दूसरी तरफ अशोक गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार को लंबा खींचना चाहते हैं और इसके जरिए वह सचिन गुट में एक बार फिर से असंतोष पैदा करना चाहते हैं !

हाल ही में वेद प्रकाश सोलंकी ने जो बयान दिया था वह असंतोष को दिखा भी रहा है जिसमें वेद प्रकाश सोलंकी ने फिर से मानेसर जाने तक की बात कह दी थी !

वहीं आलाकमान इस मामले में जल्दबाजी दिखाता नजर नहीं आ रहा और सचिन पायलट को आश्वासन के सिवा कुछ मिल नहीं रहा मामला मंत्रिमंडल में मंत्रियों को लेकर भी है क्योंकि जिन मंत्रियों को अशोक गहलोत सचिन गुट का बता रहे हैं वह अब दरअसल गहलोत गुट के हो चले और इसलिए अशोक गहलोत उस सियासी चाल को चलना चाहते हैं !

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जिसमें सही मायने के अंदर आलाकमान तक यह संदेश पहुंचा दिया जाए कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में सचिन गुट के कई विधायकों को शामिल कर लिया और हकीकत में एक भी सचिन गुट के विधायक को मंत्रिमंडल में जगह ना दी जाए यानी प्रमोद जैन भाया, प्रताप सिंह खाचरियावास, उदय लाल आंजना, रघु शर्मा और विश्वेंद्र सिंह को मंत्रिमंडल में रखा जाए और शामिल किया जाए और इन पांचों को सचिन गुट से बताया जाए !

जबकि यह पांचों आज की तारीख में गहलोत गुट में नजर आते है सचिन के लिए मंत्रिमंडल की लड़ाई इसके बाद और भी ज्यादा मुश्किल हो गई !

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