ये क्या कर बैठे गहलोत, जानबूझ कर की ऐसी गलती या अनजाने में !

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20 अगस्त को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अनेक सरकारी योजनाओं का शुभारंभ लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसी क्रम में पांच ऐतिहासिक पैनोरमा का लोकार्पण किया। लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री ने स्वीकारा किया कि इन सभी का निर्माण भाजपा शासन में राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत ने करवाया। गहलोत ने कहा कि भाजपा के शासन में 29 से भी ज्यादा पैनोरमा बने। इतने बड़े काम के लिए रिसर्च करनी पड़ती है, फील्ड में जाना होता है और फिर स्वयं को समर्पित होना पड़ता है। ये सब कार्य लखावत ने किए हैं, तभी हमारे प्रदेश की धरोहर संरक्षित हो सकती है। युवा पीढ़ी अब इन स्मारकों (पैनोरमा) को देखकर अपने पूर्वजों पर गर्व करेगी। राजस्थान की धरोहर को संरक्षित करने में लखावत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीएम गहलोत ने भाजपा नेता लखावत की यह प्रशंसा तब की है जब भाजपा और कांगे्रस में युद्ध जैसी स्थिति है। सीएम गहलोत भाजपा पर सरकार गिराने का आरोप लगा रहे हैं तो भाजपा के नेता सरकार की विफलता का दावा कर रहे हैं। सब जानते हैं कि लखावत ने हाल ही में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव लड़ा था। तभी कांग्रेस में बगावत के कयास लगाए गए। लेकिन कांग्रेस अथवा सीएम की ओर से लखावत पर कोई आरोप नहीं लगाया गया। हालांकि चुनाव में लखावत को सफलता नहीं मिली, लेकिन लखावत ने अपनी पार्टी के प्रति वफादरी दिखाई। वसुंधरा राजे के दोनों कार्यकाल में लखावत ने राजस्थान धरोहर सरंक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे। 2013 से 2018 के कार्यकाल में लखावत ने प्रदेश के अधिकांश योद्धाओं, धर्मगुरुओं आदि के स्मारक बनवाए। जिन देवताओं और वीरों का लोक कथाओं में गुणगान है उन सभी स्मारक बनवाकर इतिहास को संजोया गया। लखावत की मेहनत की प्रशंसा तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने भी खूब की है।
मुख्यमंत्री का आभार:
पैनोरमाओं के लोकार्पण से पहले सीएम अशोक गहलोत द्वारा प्रशंसा किए जाने पर लखावत ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है। लखावत ने कहा कि प्रदेश के दूर दराज के क्षेत्रों में लोक देवताओं और योद्धाओं के स्मारक बनाने का कार्य चुनौती पूर्ण था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया। मुझे आज इस बात संतोष है कि जो काम हाथ में लिया था उसे पूरा किया। वैसे भी लोक देवताओं और सूरवीरों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जो सच था उसे सीएम गहलोत ने स्वीकारा है। लखावत ने बताया कि सीएम गहलोत ने श्रीगंगानगर के रायसिंह नगर में गुुरु गोविंद के बूढा जोहड़, चित्तौडग़ढ़ में वीर गोरा बादल, चित्तौड़ के ही राशमी में भगवान परशुराम, भीलवाड़ा के आसींद में भगवान देवनारायण तथा राजसमंद में महाराणा कुंभा के पैनोरमा का लोकार्पण किया है।
रायसिंह नगर में गुरु गोविंद सिंह:
दसवें गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। धर्म की रक्षा के लिए अनेक युद्ध लड़े। आपके पुत्रों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया, लेकिन परिवार ने इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया। राजस्थान के नरेना स्थित दादूदयाल की पीठ पर उनके शिष्य से साक्षात्कार करने आए थे। गुरु गोविंद सिंह के नरेना पधारने की स्मृति में श्रीचरण गुरुद्वारा निर्मित होकर एक तीर्थ में विकसित हुआ। इस तीर्थ स्थली के निकट ही गुरु गोविंद सिंह जी का पैनोरमा का निर्माण करवाया गया है। वीर गोरा जालोर के वीर सेंगरा चौहान राजवंश में गोरा चौहान उनका भतीजा बादल ने चित्तौड़ के प्रथम खाके में अपूर्व वीरता दिखाकर समस्त भारतीय समाज को गौरवांवित किया। अलाउद्दीन खिलजी ने जब चित्तौड़ पर आक्रमण किया, तो उसका मुकाबला गोरा बादल ने शौर्य के साथ किया। रानी पदमिनी के जौहर का स्वर्णिम अध्याय गौरा बादल के विदेशी आक्रांता के विरुद्ध शौर्यतापूर्ण युद्ध लडऩे का प्रसंग हम सबके लिए गौरव का विषय है।
राणा कुंभा:
राणा कुंभा 1442 से 1467 ईसवी तक लगातार मेवाड़ तथा पूरे दक्षिण राजस्थान की स्वतंत्रता को बनाए रखा। राणा कुंभा की इसी राष्ट्रसेवा के संघर्ष से बड़ी सीख मिलती है। राणा कुंभा ने किले में कीर्ति विजय स्तंभ का निर्माण करवाया था। वे कला संस्कृति संगीत व स्थापत्य कला के पोषक थे। राणा कुंभा के जन्म स्थान माल्यावात में एक पैनोरमा का निर्माण करवाया गया है।
भगवान परशुराम:
भगवान परशुराम अवतार माने जाते हैं। इनके जीवन पर रामायण में विस्तार से वर्णन मिलता है। भगवान परशुराम अवतार के रूप में पूजे जाते हैं। इतिहास के अनुसार भगवान परशुराम राजस्थान में मातृ कुंडिया में हवन पूजन करने आए थे। यही वजह है कि मातृ कुििडया में ही भगवान परशुराम का पैनोरमा बनाया गया है।
देवनाराण भगवान:
देवनारायण भगवान वीर योद्धा, धर्मपरयाण और मर्यादापालक थे। देवनारायण सिद्ध महापुरुष तथा सिद्धियों का उपयोग लोक कल्याण के लिए करने वाले महापुरुष थे। उनके लोक कथाएं जनमानस में श्राद्ध का साथ प्रचलित है। गुर्जर व अन्य समाज में उन्हें लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि भीलवाड़ा के आसींद में भगवान देवनारायण का पैनोरमा बनाया गया है।

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