गहलोत और राजे में क्या हैं ऐसे रिश्तें ,जो विपक्ष में होते हुए भी करते हैं एक-दूसरे को सपोर्ट ?

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राज्य की राजनीति में पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ देखने को मिला ।पार्टी छोड़ने से लेकर पार्टी में वापस आने तक का सफर विधायकों के बाड़े बंदी में रहने से लेकर फिर से घर लौटने का सफर लेकिन इस सफर के दौरान जो सबसे रोचक चीज देखने को मिली वह थी मुख्यमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री के बीच की सांठगांठ।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान देखने को मिला कि जब भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को वसुंधरा राजे की जरूरत की महसूस हुई, तब वसुंधरा राजे वहां मौजूद रही अशोक गहलोत का पूरा – पूरा साथ दिया ।

सरकार गिरते देख कर यहां तक की खबरें आई थी की वसुंधरा बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाली है, तो यह कहना गलत नहीं होगा की वसुंधरा राजे ने अशोक गहलोत के लिए संजीवनी बूटी का काम किया है ।

हालांकि राज्य की राजनीति में यह अक्सर देखने को मिला है कि जब भी गहलोत सरकार या वसुंधरा सरकार किसी मुसीबत में फंसी है। उस वक्त गहलोत और वसुंधरा दोनों एक दूसरे के लिए संजीवनी बूटी बनकर आए हैं ।

इसे चाहे एक सफल राजनीतिज्ञ कहें या फिर दोनों के बीच एक रिश्ता कहें ? यह रिश्ता एक स्वस्थ पक्ष और विपक्ष के बीच का रिश्ता दर्शाता है हालांकि बहुत से लोगों द्वारा इसको नकारात्मक रूप में देखा जाता है। लेकिन अगर सही मायने में देखा जाए तो दोनों विपक्ष में रहते हुए अपनी भूमिका का पूर्ण रूप व सच्ची निष्ठा से निर्वहन करते हैं और प्रदेश की जनता द्वारा चुनी गई सरकार का सम्मान करते हैं ।

इसीलिए जब भी गहलोत सरकार या वसुंधरा सरकार सत्ता पक्ष में होती है तब विपक्ष द्वारा इस प्रकार की घिनौनि राजनीति नहीं की जाती।

यदि सफल राजनीतिज्ञ के रूप में इस घटनाक्रम को देखा जाए तो इससे साफ पता लगता है की राज्य में पक्ष और विपक्ष की एक सफल भूमिका निभाने वाले नेता राज्य की जनता को मिले हैं, जो जनता द्वारा चुनी गई सरकार का सिरमौर करते हैं और पूरे आदर सम्मान के साथ विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करते हैं।

हालांकि सही मायनों में देखा जाए तो विपक्ष की भूमिका होती है कि वह सत्ता पक्ष की खामियों को प्रदर्शित करें , नई योजनाओं के लिए अपने अपने विचार व्यक्त करें और वहीं सत्ता पक्ष का दायित्व होता हैं कि वो विपक्ष को साथ लेकर चलें और विपक्ष की बातों को तवज्जों दी जाए।

पक्ष और विपक्ष के इस मापदंड में अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे एकदम खरे उतरते हैं। शायद ये दोनों पक्ष और विपक्ष की भूमिका को अच्छे से समझते हैं और इसीलिए हर समय एक-दूसरे के लिए उपस्थित रहते हैं ।

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