सोनिया का मोदी पर वार कहा हमारी योजना की महत्ता कोरोना में आ गयी समझ

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कोरोना संक्रमण ने ना केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया हैं । कोरोना संक्रमण के चलते भारत के साथ – साथ सभी देशों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पडा हैं ।

ऐसी स्थिति में भारत के अन्दर मनरेगा ने गरीब और मजदूर तबके को राहत प्रदान की हैं । जिससे उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए गये हैं।

इसी के चलते कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी ने इस योजना के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर कांग्रेस पार्टी पर लगातार हमला बोलते हुए इसे ‘कांग्रेस की विफलता का एक जीवित स्मारक’ तक कहा था और मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म करने, इसे खोखला करने और कमजोर करने की पूरी कोशिश की लेकिन कोविड-19 महामारी और इससे उत्पन्न आर्थिक संकट ने मोदी सरकार को इस योजना की महत्ता का एहसास कराया है।

उन्होंने कहा कि मोदी को पद संभालने के बाद इस योजना का महत्व समझ तो आ गया था इसलिए उनकी सरकार ने स्वच्छ भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रमों से जोड़कर मनरेगा का स्वरूप बदलने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस सरकार की इस योजनाओं का नाम बदलने का भी पूरा प्रयास किया और मनरेगा श्रमिकों को भुगतान करने में अत्यंत देरी की गई और उन्हें काम तक दिए जाने से इंकार कर किया गया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लॉकडाउन के कारण पूरे देश के मजदूरों में रोजी रोटी को लेकर हाहाकार मचा तो मनरेगा गांव में श्रमिकों के जीवन का संबल बना। इसने मोदी सरकार को आभास दिलाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय फ्लैगशिप ग्रामीण राहत कार्यक्रमों को दोबारा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

यह एहसास होने के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में ही मनरेगा बजट में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कुल आवंटन करने की घोषणा की और मई में 2.19 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की जो आठ साल में सबसे ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि संकट के इस वक्त केंद्र सरकार को पैसा सीधा लोगों के हाथों में पहुंचाना चाहिए और सब प्रकार की बकाया राशि, बेरोजगारी भत्ता और श्रमिकों का भुगतान लचीले तरीके से बगैर देरी के करना चाहिए।

मनरेगा के महत्व को समझते हुए सरकार को मनरेगा के तहत कार्यदिवसों की संख्या बढ़ाकर 200 कर कार्यस्थल पर ही पंजीकरण कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।

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