राजस्थान में शुरू हुयी राजनीतिक नियुक्तियां, 200 कार्यकर्ताओं को कांग्रेस ने दिया ये तोहफा !

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जयपुर. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है. सरकार ने कांग्रेस पार्टी के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहे कार्यकर्ताओं को वार्ड पार्षद मनोनीत करके राजनैतिक नियुक्तियों का आगाज किया है. प्रदेश के प्रत्येक जिले के निकाय क्षेत्र में ये नियुक्तियां की जा रही हैं. प्रत्येक निकाय में कम से कम चार से पांच पार्षद नियुक्त किए जा रहे हैं. वैसे तो पार्षद बनने के लिए चुनाव लड़ा जाता है, लेकिन सरकार के पास अधिकार है कि वो किसी भी योग्य व्यक्ति का पार्षद के पद पर मनोनयन कर सकती है. इसी अधिकार के तहत सरकार पार्षद मनोनीत कर रही है.

विधायकों की सिफारिश पर किया जा रहा है अमल

पार्षद मनोनीत करने का फैसला स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल और सरकार के स्तर पर किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि पार्षद मनोनीत करने के लिए सभी कांग्रेस विधायकों से कार्यकर्ताओं की सूची मांगी गई थी. उसी के आधार पर पार्षदों का मनोनयन किया जा रहा है. स्वायत्त शासन विभाग, विधि विभाग और नगरपालिका अधिनियम के तहत बने नियमों के तहत यह मनोनयन किया जा रहा है.
सरकार ने पार्षद मनोनीत करने की शुरुआत भरतपुर और हनुमानगढ़ जिले से की. भरतपुर जिले में भरतपुर, डीग, कामां, बयाना, रुपबास और कुम्हेर में 42 पार्षद मनोनीत किए गए हैं. हनुमानगढ़ जिले में नोहर, संगरिया, रावतसर और पीलीबंगा में 37 पार्षद मनोनीत किए गए हैं. इसके बाद सरकार ने टोंक और भीलवाड़ा जिले में पार्षद मनोनीत किए. भीलवाड़ा जिले में गुलाबपुरा, गंगापुर मांडलगढ़, जहाजपुर, आसींद और शाहपुरा में 24 पार्षद मनोनीत किए. वहीं टोंक जिले में देवली, मालपुरा, टोडारायसिंह, निवाई और उनियारा में 20 पार्षद मनोनीत कर दिये हैं.
अजमेर और श्रीगंगानगर जिले में भी किए मनोनीत
इसके पीछे पीछे ही अजमेर और श्रीगंगानगर जिले में भी सरकार ने पार्षद मनोनीत कर दिये हैं. अजमेर जिले के अजमेर नगर निगम, किशनगढ़, केकड़ी, ब्यावर, सरवाड़, नसीराबाद और पुष्कर में 36 पार्षद मनोनीत किए गए हैं. इसी आदेश में श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़, अनूपगढ़, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, विजयनगर, पदमपुर, केसरीसिंहपुर, सादुलशहर और श्रीकरणपुर में 41 पार्षदों का मनोयन किया गया है.

पार्षद की तरह ही करेंगे काम
मनोनीत पार्षद की खास बात यह होती है कि उसे किसी तरह का चुनाव लड़े बिना पार्षदी करने का मौका मिल जाता है. इसके माध्यम से वो जनता के कार्य एक पार्षद की भांति करवा पाता है. मनोनीत पार्षद निगम, परिषद और पालिका की बैठकों में भी बराबर भाग ले सकते हैं. इनका कार्यकाल भी राज्य सरकार के आदेशों के तहत निगम, परिषद और पालिका बोर्ड के मौजूदा कार्यकाल अथवा सरकार के आदेश जो भी पहले हो उसके आधार पर होता है.

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