विरोधियों ने बचा ली गहलोत सरकार, कभी थे मुसीबत आज बने सहारा !

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सीकर. सियासत में दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही ज्यादा दिन नहीं चलती। राजस्थान के सियासी संग्राम में कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने ताल ठोकने वाले नेता ही अब कांग्रेस के लिए सहारा बने हुए हैं। वह भी ऐसे वक्त में जब खुद इनकी पार्टी के नेता इनके सामने ताल ठोक रहे हैं। सीएम अशोक गहलोत को निर्दलीय व अन्य दलों से समर्थन देने वालों में भी सबसे आगे शेखावाटी के नेता है। चुनाव जीतने के बाद जब आलाकमान मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन कर रहा था तब सबसे पहले सीकर जिले की खंडेला विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक महादेव सिंह ने ऐलान किया था कि यदि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनते हैं तो वह समर्थन देने को तैयार है। इसके बाद प्रदेश के कई निर्दलीय विधायकों की ओर से मुख्यमंत्री के समर्थन में पत्र दिए गए। लगभग डेढ़ साल बाद कांग्रेस में फिर सत्ता को लेकर संग्राम हुआ। इस दौर में भी उदयपुरवाटी के बसपा विधायक राजेन्द्र गुढ़ा का नाम सबसे पहले सामने आया। गुढ़ा ने संग्राम के पहले दिन ही ऐलान किया कि हमारे नेता अशोक गहलोत है।

गुढा दो बार जीते, एक बार मंत्री बने, अब फिर दौड़ में
उदयपुरवाटी से दूसरी बार राजेन्द्र गुढा विधायक बने हैं। अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। दोनों बार बसपा से जीते, लेकिन कांग्रेस में शामिल हो गए। एक बार राज्य मंत्री रह चुके। गहलोत गुट के हैं। गहलोत के पक्ष में खुलकर बोलते हैं। इस बार फिर से मंत्री पद की दौड़ में शामिल है।
खंडेला दो बार निर्दलीय जीते, केन्द्र में मंत्री भी रहे
खंडेला विधायक महादेव सिंह खंडेला अब तक छह बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। इनमें से दो बार निर्दलीय के तौर महादेव सिंह ने खंडेला विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। पिछले चुनाव में भी कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर ताल ठोकी थी। इस बार मंत्री पद की दौड़ में इनका नाम भी शामिल है। खंडेला यूपीए सरकार में मंत्री भी रह चुके है।

इधर… सरकार सियासी संग्राम में, अफसरशाही के भरोसे प्रदेश
पिछले एक सप्ताह से सरकार पूरी तरह सियासी संग्राम में उलझी है और नौकरशाही के भरोसे पूरा प्रदेश है। ज्यादातर विभागों में नए फैसले पूरी तरह अटक गए हैं। विभाग के उच्च अधिकारी भी बिना मंत्रियों से चर्चा किए कोई नए फैसले नहीं ले पा रहे हैं। प्रदेश में अटकी भर्तियों को लेकर बेरोजगारों की ओर से पिछले महीने सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरीकों से आंदोलनों की मुहिम चलाई जा रही थी। लेकिन नेताओं के ‘संग्रामÓ में व्यस्त होने के कारण बेरोजगारों को अब नेताओं के अनलॉक होने का इंतजार है। प्रदेश के सभी जिलों में भाजपा, माकपा व बसपा सहित अन्य दलों की ओर से बिजली बिल माफी को लेकर आंदोलनों की मुहिम शुरू की थी। लेकिन सरकार के आपस में उलझने के बाद विपक्ष की ओर से इन मांगों को लेकर आंदोलन भी कमजोर पड़ता जा रहा है।

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