गहलोत बना रहे सचिन की सियासत खत्म करने की रणनीति !

0

यकीकन ऐसी तस्वीरें आई हैं, जिनमें ये दिखाने की कोशिश की गई है कि सचिन-गहलोत, फिर से साथ साथ हैं . लेकिन सचिन पायलट की वापसी के साथ साथ ही गहलोत अपनी सियासत को धार देने में लगे हैं और अब जिस सियासत को गहलोत चलना चाहते हैं उसमें सचिन के लिए कोई जगह दिखाई नहीं दे रही . माना जा रहा है कि अशोक गहलोत चक्रव्यूह बनाने की तैयारी कर रहे हैं ,जिसमें राजनीतिक नियुक्ति, कैबिनेट विस्तार और संगठन विस्तार को निकाय चुनाव के बाद करने की तैयारी की जा रही है और सचिन गुट को इसमें त्रि-स्तरीय फंसाने की रुपरेखा बनाई जा रही है . इसके पीछे का एक और कारण सामने आ रहा है ,माना जा रहा है कि गहलोत मंत्रीमंडल का विस्तार मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर उप-चुनाव के परिणाम के बाद किया जा सकता है . अब आप सोच रहे होंगे कि गहलोत मंत्रीमंडल का मध्यप्रदेश के चुनाव से क्या लेना देना ? हम आपको बताते हैं दरअसल मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर उप-चुनाव होने हैं और इनमें से ज्यादातर सीटों पर गुर्जर वोट निर्णायक भूमिका में है और कमलनाथ के कहने पर प्रियंका गांधी सचिन की वापसी के लिए राजी हुई हैं और गहलोत को मनाया है .अब सचिन चाह रहे हैं कि मंत्रीमंडल विस्तार, संगठन नियुक्ति और राजनीति नियुक्ति जल्दी से जल्दी हो और गहलोत चाह रहे हैं कि किसी तरीके से इनको राजस्थान निकाय चुनाव और मध्यप्रदेश के उप-चुनाव तक रोका जाए . इसके लिए खबर है कि गहलोत गुट के 101 विधायक प्रियंका-राहुल गांधी से मुलाकात की रणनीति बनाई जा रही है .इस मुलाकात में सभी विधायक खुलकर अपनी नाराजगी जताएंगे . ऐसे हालात पैदा करेंगे कि अगर सचिन गुट को तवज्जो दी गई तो फिर वो कांग्रेस से दूर हो जाएंगे और गहलोत उनके समर्थन में खड़े होंगे और इस घटनाक्रम के बाद गहलोत गुट कुछ वक्त के लिए मंत्रीमंडल विस्तार को रोक देगा और जैसे ही निकाय और मध्यप्रदेश उप-चुनाव के परिणाम आएंगे .गहलोत सचिन की सियासत का फैसला करेंगे .इस बीच सचिन क्या करते हैं ,ये सियासी तौर पर समझना होगा अगर सचिन मंत्रीमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्त और संगठन विस्तार को जल्दी करा पाए, तो जीत उनकी और नहीं करा पाए तो जीत गहलोत की .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here