गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे ‘कामराज’ फॉर्मूला से ?

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कांग्रेस में लगातार राष्ट्रीय अध्यक्ष की मांग तेज हो रही है, गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल सरीखे नेता लगातार बोल रहे हैं कि नया अध्यक्ष का चुनाव हो । वहीं राहुल, प्रियंका और सोनिया चाहती हैं कि अगला अध्यक्ष गैर गांधी परिवार से हो । लेकिन क्या गांधी परिवार इतिहास को दोहराने की कोशिश कर रहा है और इतिहास को दोहराते हुए कांग्रेस को जिंदा करने की कोशिश । क्या कांग्रेस फिर से कामराज प्लान पर काम कर रही है ?

दरअसल साल 1962 में चीन के हाथों भारत की करारी हार के बाद पं. नेहरु की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई थी । लोगों में कांग्रेस के प्रति गुस्सा था, खासकर नेहरु के प्रति । ऐसे में कांग्रेस में एक फैसला लिया गया और 1963 में मद्रास के मुख्यमंत्री कामराज ने पं. नेहरु को सलाह दी और इसके बाद लोगों को गुस्से को शांत करने के लिए कांग्रेस मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने इस्तीफे दिए । पं. नेहरु ने कुमार स्वामी कामराज को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया । इसके बाद धीरे धीरे कांग्रेस के प्रति लोगों का गुस्सा शांत हो गया था और कांग्रेस फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो गई थी ।

वर्तमान में भी लग रहा है कि कांग्रेस वापस कामराज प्लान पर लौट रही है और इसी प्लान को आगे बढ़ाते हुए गौरव गोगाई, जो युवा नेता हैं, उनको लोकसभा में पार्टी का उपनेता बनाया गया है और लग रहा है कि कामराज फॉर्मूले को लागू करने के लिए राहुल गांधी काम कर रहे हैं । अगर ये फॉर्मूला सही रहा तो फिर मान कर चलिए कि कुछ कांग्रेस शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों को बदला जा सकता है ।CWC को बदला जा सकता है और राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर कुछ वक्त के लिए गैर गांधी को बैठाया जा सकता है ।

अगर ऐसा होता है तो फिर कामराज की भूमिका में अशोक गहलोत हो सकते हैं और उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है । इसके जरिए गांधी परिवार के प्रति ना सिर्फ गुस्सा कम होगा । बल्कि एक परिवार की पार्टी होने का तमगा भी कांग्रेस के चेहरे से हट जाएगा ।लेकिन सच ये भी है कि आज की कांग्रेस पंडित नेहरु वाली कांग्रेस नहीं है, इसलिए बिखराव की तरफ भी कांग्रेस को ध्यान देना होगा ।

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