सरकार पर भड़का प्रवासियों का आक्रोश, आगरा-दिल्ली हाइवे पर लगाई आग !

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आगरा.

आसमान से गिरा खजूर में अटका। 56 दिन से बेरोजगारी में घरों में बंद श्रमिकों के सामने विषम हालात हैं। कनस्‍तर खाली हो गई और जेब से उंगुली आर-पार। उस पर कोरोना संक्रमण लग जाने का डर। इस मजबूरी में अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के ख्‍याल से पैदल ही अपने गांव की ओर चल पड़े मजदूरों को रास्‍ते में रोका जाना खल रहा है। सरकार ने बंदोबस्‍त तो कर दिए लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले रास्‍ते में अब कोई रुकना नहीं चाहता।

दिल्ली-आगरा हाइवे पर हजारों मजदूर पैदल चल रहे हैं। रविवार सुबह कामगारों का सब्र का बांध टूट गया। मथुरा में थाना फरह क्षेत्र में मजदूरों ने हाईवे पर जाम लगाकर आक्रोश व्यक्त किया और हंगामा किया। झाड़ियों में आग लगाई गई।

मजदूरों का आक्रोश थामे से भी नहीं थम रहा था। उनका कहना था कि वह दो-तीन दिन से भूखे प्यासे हैं। उनकी कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। उनको पैदल भी नहीं चलने दिया जा रहा है। ना ही उनके लिए वाहन ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आखिर में वे क्या करें।

इधर कोसीकला के कोटवन बॉर्डर पर भी सुबह मजदूरों को रोकने की कोशिश की गई, मगर हजारों मजदूरों का काफिला आगे की तरफ बढ़ गया। मजदूरों को रोकने के पुलिस और प्रशासन के सभी प्रयास अभी तक विफल साबित हो रहे हैं ।

दरअसल, बॉर्डर पर रोडवेज बसों की व्यवस्था कराई जा रही है, जो मजदूरों की संख्या के हिसाब से काफी कम है। रोडवेज बसों के अलावा प्राइवेट वाहनों से मजदूरों के जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। यही कारण है कि मजदूरों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही हैं।

थाना फरह क्षेत्र में हाईवे पर जाम लगा रहे मजदूरों की मांग है कि उनको उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तत्काल वाहनों की व्यवस्था कराई जाए। इधर मजदूरों के आक्रोश को देखते हुए सिटी सर्किल के पुलिस फोर्स को मौके पर भेजा जा रहा है। जो पुलिसकर्मी वहां मौजूद हैं, वे मजदूरों को समझाने के प्रयास कर रहे हैं।

मगर मजदूर अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। सुबह 9.30 बजे तक मजदूरों का हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन जारी हैं।

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