व्यापारियों के लिए सीएम गहलोत का बड़ा फैसला, देर रात लिया फैसला !

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जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कारोबारियों की मांग को देखते हुए कृषि जिंसों पर शुल्क कम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं ।
हाल ही में राज्य सरकार द्वारा लगाए गए कृषि जिंसों पर 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क को कम किया जाएगा। विभिन्न कृषि जिंसों पर अब 2 प्रतिशत की जगह एक और आधा प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। बता दें कि कारोबारी शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहे थे।

देर रात ट्वीट कर दी जानकारी

गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि जिन कृषि जिंसों पर आधा प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जा रहा है उन पर अब 2 प्रतिशत की जगह आधा प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लेने के निर्देश दे गए हैं। वहीं जिन जिंसों पर 1 और 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जा रहा है उन पर भी अब 2 की बजाय एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा । नए निर्देशों के मुताबिक अब दलहन, तिलहन और अनाज पर 1 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क होगा जबकि ईसबगोल, जीरा, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि पर आधा प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लगेगा. वहीं ऊन को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है। पहले सभी जिंसों पर 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया था। कृषक कल्याण शुल्क को लेकर खाद्य पदार्थ से जुड़े प्रदेशभर के व्यापारियों एवं उद्योगों की चिंताओं को समझते हुए उन्हें राहत देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किया है।

कारोबारी कर रहे थे विरोध

राज्य सरकार द्वारा लगाए गए 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क का बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिल रहा था। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आह्वान पर पिछले दिनों प्रदेश की सभी मंडियों में हड़ताल रही थी जबकि कुछ मंडियां अब भी इस शुल्क के विरोध में बंद है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के मुताबिक सीएम ने पिछले दिनों ही इस मसले पर सकारात्मक रुख दिखाया था। उसके बाद मण्डियों में हड़ताल वापस ले ली गई थी। अब संघ के साथ दोबारा बातचीत के बाद सीएम ने इस सम्बन्ध में अधिकारियों को शुल्क कम करने के निर्देश दे दिए हैं।

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट कर की थी शुल्क हटाने की मांग

कृषक कल्याण शुल्क का विरोध प्रदेश में राजनीतिक मुद्दा भी बन रहा था। बीजेपी-रालोपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे लेकर विरोध जताया था और शुल्क हटाने की मांग की थी।वहीं पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट कर राज्य सरकार से शुल्क वापस लेने की मांग की थी। विभिन्न राजनीतिक और कारोबारी संगठन भी इसे लेकर विरोध जता रहे थे।

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